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भगवान विश्वकर्मा के सभी मंत्र हिंदी और संस्कृत में

भगवान विश्वकर्मा के सभी मंत्र हिंदी और संस्कृत में

भगवान विश्वकर्मा के सभी मंत्र हिंदी और संस्कृत में

भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और निर्माण, वास्तुकला, कला, तकनीक तथा शिल्प के अधिष्ठाता देवता माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा के दिन विशेष रूप से मशीनों, औजारों, उपकरणों, वाहनों और कार्यस्थल की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा का ध्यान और मंत्र जाप करके सुख, समृद्धि, कार्यकुशलता और सफलता की प्रार्थना की जाती है।

 विश्वकर्मा पूजा मंत्र के मुख्य प्रकार 

 विश्वकर्मा पूजा  मूल मंत्र

 

ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः॥

 

एक विस्तृत स्तुति-मंत्र के रूप में यह भी बोला जाता है:

 

ॐ आधारशक्तपे नमः।

ॐ कूर्माय नमः।

ॐ अनन्ताय नमः।

ॐ पृथिव्यै नमः।

ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः॥

 

सरल अर्थ:

मैं भगवान विश्वकर्मा को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करता हूँ। 

 

विश्वकर्मा गायत्री मंत्र

 

श्री विश्वकर्मा गायत्री मंत्र

 

ॐ विश्वकर्मणे विद्महे

देवशिल्पिने धीमहि।

तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात्॥

 

जप: पूजा के समय श्रद्धापूर्वक 11, 21 या 108 बार जप किया जा सकता है।

 

सरल अर्थ

 

हम सृष्टि के दिव्य शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा का ज्ञान प्राप्त करें, उनका ध्यान करें और वे हमारी बुद्धि को श्रेष्ठ कर्म एवं सृजन की ओर प्रेरित करें।

 

 विश्वकर्मा पूजा आवाहन मंत्र

 

विश्वकर्मा पूजा में आवाहन (भगवान को पूजन हेतु आमंत्रित करने) के लिए आप यह विस्तृत पाठ कर सकते हैं। अलग-अलग पूजा-पद्धतियों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है।

 

श्री विश्वकर्मा आवाहन मंत्र

 

ॐ विश्वकर्मन् हविषा वावृधानः

स्वयं यजस्व पृथिवीमुत द्याम्।

मुह्यन्त्वन्ये अभितः सपत्ना

इहास्माकं मघवा सूरिरस्तु॥

 

ॐ भूर्भुवः स्वः।

श्रीविश्वकर्मणे नमः।

 

हे देवशिल्पिन् महाभाग, देवानां कार्यसाधक।

विश्वकर्मन् नमस्तुभ्यं, सर्वाभीष्टप्रदायक॥

 

आगच्छ भगवन् देव विश्वकर्मन् जगत्पते।

पूजार्थं त्वामहं भक्त्या आवाहयामि सुव्रत॥

 

इहागच्छ इह तिष्ठ, इह सन्निधिं कुरु।

मम पूजां गृहाण त्वं, प्रसन्नो भव सर्वदा॥

 

श्रीभगवान् विश्वकर्माणं सांगं सपरिवारं

सायुधं सशक्तिकं आवाहयामि, स्थापयामि॥

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि॥

 

इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा/चित्र के सामने पुष्प और अक्षत अर्पित करें और कहें:

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

आसनं समर्पयामि॥

 

 

 विश्वकर्मा पूजा प्राण प्रतिष्ठा मंत्र

 

यदि आप विश्वकर्मा पूजा में मूर्ति/प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पूरा पाठ चाहते हैं, तो नीचे एक प्रचलित संस्कृत क्रम दिया जा रहा है। अलग-अलग पुरोहित-परंपराओं में बीजाक्षर और विनियोग में थोड़ा अंतर मिल सकता है; स्थायी मंदिर-मूर्ति की प्रतिष्ठा के लिए आचार्य की विधि ही मानें।

 

श्री विश्वकर्मा प्राण-प्रतिष्ठा मंत्र

 

॥ विनियोग ॥

 

ॐ अस्य श्रीप्राणप्रतिष्ठा मन्त्रस्य ब्रह्म-विष्णु-महेश्वरा ऋषयः।

ऋग्यजुःसामानि छन्दांसि। प्राणशक्तिर्देवता।

आं बीजम्। ह्रीं शक्तिः। क्रौं कीलकम्।

श्रीविश्वकर्मदेवस्य प्राणप्रतिष्ठापने विनियोगः॥

 

॥ प्राण आवाहन ॥

 

ॐ आं ह्रीं क्रौं यं रं लं वं शं षं सं हं सः।

श्रीविश्वकर्मदेवस्य प्राणा इह प्राणाः॥

 

॥ जीव स्थापना ॥

 

ॐ आं ह्रीं क्रौं यं रं लं वं शं षं सं हं सः।

श्रीविश्वकर्मदेवस्य जीव इह स्थितः॥

 

॥ इन्द्रिय स्थापना ॥

 

ॐ आं ह्रीं क्रौं यं रं लं वं शं षं सं हं सः।

श्रीविश्वकर्मदेवस्य सर्वेन्द्रियाणि—

वाङ्मनस्त्वक्-चक्षुः-श्रोत्र-जिह्वा-घ्राण-पाणि-पाद-पायूपस्थानि

इहैवागत्य सुखं चिरं तिष्ठन्तु स्वाहा॥

 

॥ स्थिरीकरण प्रार्थना ॥

 

अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु, अस्यै प्राणाः क्षरन्तु च।

अस्यै देवत्वमर्चायै, मामहेति च कश्चन॥

 

इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का आवाहन करें:

 

ॐ विश्वकर्मन् इहागच्छ इहागच्छ।

इह तिष्ठ इह तिष्ठ।

अत्राधिष्ठानं कुरु।

मम पूजां गृहाण॥

 

फिर कहें:

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

आवाहयामि। स्थापयामि। सन्निधापयामि।

पूजयामि नमः॥

 

इसके बाद “ॐ विश्वकर्मणे नमः” का 11, 21 या 108 बार जप करके चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।

 

 विश्वकर्मा पूजा मंत्र

 

1. गणेश पूजन

 

ॐ गं गणपतये नमः॥

 

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

 

2. संकल्प

 

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः।

मम सकुटुम्बस्य सुख-शान्ति-समृद्ध्यर्थं,

व्यवसाय-कार्य-सिद्ध्यर्थं, सर्वविघ्न-निवारणार्थं

श्रीविश्वकर्मदेवस्य पूजनमहं करिष्ये॥

 

3. भगवान विश्वकर्मा का ध्यान

 

ॐ विश्वकर्मणे नमः॥

 

विश्वकर्मन् हविषा वावृधानः

स्वयं यजस्व पृथिवीमुत द्याम्।

मुह्यन्त्वन्ये अभितः सपत्ना

इहास्माकं मघवा सूरिरस्तु॥

 

4. आवाहन एवं स्थापना

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

श्रीविश्वकर्मदेवम् आवाहयामि।

स्थापयामि। पूजयामि॥

 

आगच्छ देवदेवेश विश्वकर्मन् जगत्पते।

पूजां गृहाण देवेश सर्वसिद्धिप्रदो भव॥

 

5. आसन अर्पण

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

आसनं समर्पयामि॥

 

6. पाद्य अर्पण

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

पादयोः पाद्यं समर्पयामि॥

 

7. अर्घ्य

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

हस्तयोः अर्घ्यं समर्पयामि॥

 

8. आचमन

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

आचमनीयं जलं समर्पयामि॥

 

9. स्नान

 

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।

नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

स्नानार्थं जलं समर्पयामि॥

 

10. वस्त्र अर्पण

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

वस्त्रं समर्पयामि॥

 

11. यज्ञोपवीत

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

यज्ञोपवीतं समर्पयामि॥

 

12. चंदन

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

गन्धं समर्पयामि॥

 

13. अक्षत

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

अक्षतान् समर्पयामि॥

 

14. पुष्प

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

पुष्पाणि समर्पयामि॥

 

15. धूप

 

वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः।

आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

धूपमाघ्रापयामि॥

 

16. दीप

 

साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।

दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

दीपं दर्शयामि॥

 

17. नैवेद्य

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

नैवेद्यं निवेदयामि॥

 

इसके बाद:

 

ॐ प्राणाय स्वाहा।

ॐ अपानाय स्वाहा।

ॐ व्यानाय स्वाहा।

ॐ उदानाय स्वाहा।

ॐ समानाय स्वाहा॥

 

18. फल अर्पण

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

ऋतुफलानि समर्पयामि॥

 

19. ताम्बूल एवं दक्षिणा

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

ताम्बूलं समर्पयामि॥

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः।

दक्षिणां समर्पयामि॥

 

20. औजार, मशीन एवं वाहन पूजा

 

अपने औजारों/मशीनों के सामने पुष्प, अक्षत और चंदन अर्पित करते हुए बोलें:

 

ॐ श्रीविश्वकर्मणे नमः॥

 

हे भगवान विश्वकर्मा, हमारे कार्य, शिल्प, यंत्र, औजार और कर्मक्षेत्र की रक्षा करें तथा हमारे कार्यों में सफलता प्रदान करें।

 

 विश्वकर्मा पूजा प्रार्थना

 

॥ श्री विश्वकर्मा प्रार्थना ॥

 

हे विश्वकर्मन् देवेश,

सर्वशिल्पप्रवर्तक।

सर्वकार्येषु मे सिद्धिं,

प्रसन्नो भव सर्वदा॥

 

हे देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा!

आप समस्त सृष्टि के महान शिल्पकार, निर्माण-कला के अधिष्ठाता और कर्म-कौशल के प्रेरणास्रोत हैं। हम श्रद्धा और भक्ति के साथ आपके श्रीचरणों में प्रणाम करते हैं।

 

हे प्रभु! हमारे कार्यस्थल, उद्योग, व्यापार, मशीनों, औजारों और सभी कार्य-साधनों पर अपनी कृपा बनाए रखें। हमारे प्रत्येक कार्य में कुशलता, सफलता और उन्नति प्रदान करें।

 

हमारे मन और बुद्धि को शुद्ध रखें। हमें सत्य, धर्म और ईमानदारी के मार्ग पर चलते हुए परिश्रम करने की शक्ति दें। हमारे हाथों से सदैव शुभ, श्रेष्ठ और लोकहितकारी कार्य हों।

 

हे भगवान विश्वकर्मा! हमारे कार्यों में आने वाली बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करें। दुर्घटनाओं से हमारी रक्षा करें तथा हमारे कार्यस्थल पर सुख, शांति, सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करें।

 

हमारे परिवार, सहयोगियों, कर्मचारियों और समस्त कर्मशील जनों पर अपनी कृपा-दृष्टि बनाए रखें। सभी के जीवन में स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और सफलता प्रदान करें।

 

हे देवशिल्पी विश्वकर्मा! हमें ऐसा ज्ञान, कौशल और सामर्थ्य प्रदान करें जिससे हम अपने कर्म को पूरी निष्ठा और लगन से कर सकें तथा अपने कार्यों से समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान दे सकें।

 

जाने-अनजाने हमसे पूजा अथवा कर्म में जो भी त्रुटि हुई हो, हे प्रभु! उसे क्षमा करें और हमारी पूजा स्वीकार करें।

 

ॐ विश्वकर्मणे नमः।

ॐ विश्वकर्मणे नमः।

ॐ विश्वकर्मणे नमः॥

 

भगवान विश्वकर्मा की जय!

देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जय!

 

विश्वकर्मा पूजा जयकारा

 

बोलो भगवान श्री विश्वकर्मा जी की — जय!

देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की — जय!

सृष्टि के महान शिल्पकार की — जय!

वास्तु एवं शिल्पकला के देवता की — जय!

भगवान विश्वकर्मा महाराज की — जय!

विश्व के निर्माता विश्वकर्मा भगवान की — जय!

औजार एवं मशीनों के आराध्य देव की — जय!

शिल्प और निर्माण के अधिष्ठाता की — जय!

सभी कारीगरों के आराध्य देव की — जय!

श्री विश्वकर्मा भगवान की — जय!

 

बोलो विश्वकर्मा बाबा की — जय!

बोलो विश्वकर्मा भगवान की — जय!

जय विश्वकर्मा! जय विश्वकर्मा!

जय-जय श्री विश्वकर्मा भगवान!

 

विश्वकर्मा पूजा के समय मंत्र बोलते हुए कुछ बातों का ध्यान रखना उपयोगी है:

 

शुद्ध उच्चारण: मंत्र को बहुत तेज़ न बोलें। जितना संभव हो स्पष्ट और सही उच्चारण करें। गलती हो जाए तो घबराने के बजाय श्रद्धापूर्वक दोबारा बोल सकते हैं।

भाव और एकाग्रता: मंत्र केवल जल्दी-जल्दी पूरा करने के बजाय भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए बोलें।

“ॐ विश्वकर्मणे नमः” जैसे सरल मंत्र का जप 11, 21 या 108 बार किया जा सकता है।

आवाहन के समय: हाथ में पुष्प और अक्षत लेकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें और फिर उन्हें अर्पित करें।

अर्पण के मंत्र: चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करते समय संबंधित मंत्र के अंत में “समर्पयामि” कहा जा सकता है।

मंत्र न आता हो: गलत या अधूरा संस्कृत मंत्र बोलने की अपेक्षा “ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः” श्रद्धापूर्वक बोलना बेहतर है।

मंत्रों का क्रम: सामान्यतः ध्यान → आवाहन → आसन → पाद्य/अर्घ्य → स्नान → वस्त्र → चंदन → पुष्प → धूप → दीप → नैवेद्य → मंत्र-जप → आरती → प्रार्थना का क्रम रखा जा सकता है।

स्थायी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा: यह सामान्य पूजा से अलग विस्तृत धार्मिक संस्कार है। इसे संबंधित परंपरा के योग्य पुरोहित/आचार्य के मार्गदर्शन में करना चाहिए।

 

पूजा के अंत में “ॐ विश्वकर्मणे नमः” बोलकर पुष्प अर्पित करें और फिर “बोलो भगवान श्री विश्वकर्मा जी की—जय!” का जयकारा लगाया जा सकता है।

 

नोट: पूजा का शुभ समय — प्रातः ___ बजे से ___ बजे तक।

विशेष सूचना: श्री विश्वकर्मा पूजा निर्धारित शुभ मुहूर्त में संपन्न होगी।

पूजा समय: प्रातः ___ बजे | सभी श्रद्धालु सादर आमंत्रित हैं।

नोट: कृपया पूजा प्रारंभ होने से 15 मिनट पूर्व उपस्थित हों।

श्री विश्वकर्मा पूजन एवं आरती — समय: ___ बजे से।

पूजा के उपरांत प्रसाद वितरण किया जाएगा।