विश्वकर्मा पूजा आरती संपूर्ण पाठ विधि और धार्मिक महत्व
विश्वकर्मा पूजा आरती भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक महत्वपूर्ण आरती है, जिसे पूजा के अंत में श्रद्धा और भक्ति के साथ गाया जाता है। इस लेख में पढ़ें विश्वकर्मा पूजा आरती का संपूर्ण पाठ हिंदी में, साथ ही जानें आरती करने की सही विधि, पूजा के दौरान इसका महत्व और भगवान विश्वकर्मा की कृपा प्राप्त करने का धार्मिक महत्व। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मशीनों, औजारों और कार्यस्थल की पूजा के बाद आरती करना शुभ माना जाता है।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती
विश्वकर्मा पूजा में पढ़ी जाने वाली आरती के प्रकार ये प्रमुख रूप से आरतियाँ प्रचलित हैं:
श्री विश्वकर्मा जी की आरती – मुख्य आरती, भगवान विश्वकर्मा को समर्पित।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, तुम हो विश्वकर्मा॥
चार भुजा धारी प्रभु, सुंदर रूप तुम्हारा।
मस्तक मुकुट विराजे, तेज अपार तुम्हारा॥
हाथों में औजार लिए, शोभा अति न्यारी।
शिल्प कला के स्वामी, महिमा सबसे प्यारी॥
देवों के भवन बनाए, दिव्य नगर बसाए।
स्वर्गलोक की रचना कर, सबको सुख पहुँचाए॥
इंद्रपुरी हो या लंका, द्वारका नगरी प्यारी।
तुम्हारी ही कला से, बनी सभी अति न्यारी॥
शिव का त्रिशूल बनाया, विष्णु का चक्र बनाया।
देवों के अस्त्र-शस्त्रों को, तुमने रूप दिलाया॥
कारीगर और श्रमिक, करते तेरा ध्यान।
तेरी कृपा से प्रभु, सफल हो हर काम॥
मशीनें और औजार, सबकी पूजा होती।
तेरे आशीर्वाद से, उन्नति जीवन में होती॥
धन-धान्य और सुख देना, दूर करो दुख भारी।
परिवार में खुशहाली हो, महिमा तेरी न्यारी॥
जो कोई श्रद्धा से, विश्वकर्मा गुण गाए।
मनवांछित फल पाकर, जीवन सफल बनाए॥
जय-जय श्री विश्वकर्मा, जय विश्वकर्मा देवा।
भक्तों की रक्षा करना, स्वीकार करो सेवा॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु आरती – पूजा के अंत में गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, तुम हो विश्वकर्मा॥
आरती समाप्ति
श्री विश्वकर्मा भगवान की जय।
विश्वकर्मा देव की जय।
सभी भक्तों की जय।
जय श्री विश्वकर्मा महाराज।
विश्वकर्मा भगवान की स्तुति आरती – भगवान की महिमा, सृष्टि निर्माण और शिल्प-कला की शक्ति का वर्णन।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के रचयिता, जय श्री विश्वकर्मा॥
देवों के शिल्पी तुम हो, ज्ञान कला के सागर।
तेरी महिमा अपरंपार, तुम जग के पालनहार॥
स्वर्ग लोक के भवन बनाए, सुंदर महल सजाए।
देवपुरी को सुंदर करके, सबके मन को भाए॥
इंद्रपुरी का निर्माण किया, लंका नगरी बनाई।
द्वारका धाम रचाया प्रभु, अपनी कला दिखाई॥
शस्त्र अस्त्र तुमने बनाए, देवों के हितकारी।
वज्र सुदर्शन चक्र बनाए, महिमा तेरी न्यारी॥
जो कोई तेरी आरती गाए, मनवांछित फल पाए।
सुख संपत्ति और यश पाकर, जीवन सफल बनाए॥
घर उद्योग और कार्यस्थल में, तेरी पूजा जो करता।
बुद्धि विवेक सफलता पाकर, जीवन सुखमय करता॥
शरण पड़े हम विश्वकर्मा, रखियो लाज हमारी।
कृपा करो हे शिल्पी देव, सुन लो विनती हमारी॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के रचयिता, जय श्री विश्वकर्मा॥
जो श्रद्धा से आरती गाए, पाप सभी मिट जाएं।
विश्वकर्मा भगवान की कृपा से, सुख समृद्धि घर आए॥
औजार एवं कार्यस्थल की पूजा के बाद आरती – मशीनों, औजारों और कार्यस्थल की पूजा के समापन पर की जाती है।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के रचयिता, जय श्री विश्वकर्मा॥
शिल्प कला के स्वामी तुम, जग के पालनहारे।
औजारों में शक्ति भरो, काटो दुख हमारे॥
हथौड़ा छेनी औजारों में, तेरा ही प्रकाश।
तेरी कृपा से कर्म करें हम, पूर्ण हो हर आस॥
कारखाने और कार्यस्थल में, तेरा वास रहे।
मेहनत करने वाले जन का, सदा विकास रहे॥
लोहे लकड़ी और मशीनों में, तेरी शक्ति समाई।
तेरी कृपा से कर्मभूमि ने, नई राह दिखाई॥
जो श्रम करते तेरी शरण में, उनका मान बढ़ाओ।
सुख समृद्धि और सफलता से, उनका घर भर जाओ॥
औजार हमारे सुरक्षित रखना, दुर्घटना दूर भगाना।
कर्म करें हम श्रद्धा भाव से, अपना आशीष दिलाना॥
ज्ञान बुद्धि और कौशल देना, कर्म में सिद्धि दिलाओ।
विश्वकर्मा भगवान हमारे, सदा कृपा बरसाओ॥
दीप जलाकर आरती उतारें, श्रद्धा मन में लाएं।
विश्वकर्मा भगवान की महिमा, मिलकर सभी गाएं॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के रचयिता, जय श्री विश्वकर्मा॥
तेरी कृपा से कार्य सफल हो, धन धान्य घर आए।
सुख शांति और मंगल से, जीवन सदा सजाए॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
औजार एवं कार्यस्थल के स्वामी, जय श्री विश्वकर्मा॥
विश्वकर्मा पूजा की संपूर्ण पाठ विधि
1. पूजा का संकल्प
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान, औजारों, मशीनों और कार्यस्थल को साफ करें। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प करें।
संकल्प मंत्र
ॐ श्री गणेशाय नमः।
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः॥
हे भगवान विश्वकर्मा, मैं श्रद्धा और भक्ति भाव से आपकी पूजा करता हूं। मेरे घर, परिवार, कार्यस्थल, व्यापार तथा सभी कार्यों में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता प्रदान करें।
2. भगवान गणेश का स्मरण
पूजा प्रारंभ करने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें।
मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
3. भगवान विश्वकर्मा का ध्यान
हाथ जोड़कर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें।
ध्यान मंत्र
ॐ विश्वकर्मणे नमः॥
हे देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा, आप समस्त सृष्टि के रचयिता और शिल्प कला के अधिष्ठाता हैं। हम आपको प्रणाम करते हैं। हमारे कार्यों में सफलता, बुद्धि, कौशल और उन्नति प्रदान करें।
4. आवाहन
भगवान विश्वकर्मा को पूजा में विराजमान होने का निवेदन करें।
मंत्र
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः।
आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि॥
हे भगवान विश्वकर्मा, कृपया इस पूजा में पधारकर हमारी प्रार्थना स्वीकार करें।
5. पंचोपचार पूजा
भगवान को क्रम से जल, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
जल अर्पण
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः।
इदं जलं समर्पयामि॥
पुष्प अर्पण
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः।
पुष्पाणि समर्पयामि॥
धूप अर्पण
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः।
धूपं समर्पयामि॥
दीप अर्पण
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः।
दीपं दर्शयामि॥
नैवेद्य अर्पण
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः।
नैवेद्यं निवेदयामि॥
6. औजार एवं कार्यस्थल की पूजा
अब अपने सभी औजार, मशीन, उपकरण और कार्यस्थल पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। दीप और धूप दिखाएं।
प्रार्थना
हे भगवान विश्वकर्मा, इन औजारों और उपकरणों में अपनी शक्ति और शुभ ऊर्जा प्रदान करें। हमारे कार्यस्थल को सुरक्षित रखें और हमारे सभी कार्यों में सफलता दें।
7. विश्वकर्मा मूल मंत्र का जाप
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक 11, 21 या 108 बार जाप करें।
8. भगवान विश्वकर्मा की स्तुति
हे विश्वकर्मा भगवान, आप देवताओं के महान शिल्पी और सृष्टि के रचनाकार हैं। आपने अपने दिव्य ज्ञान और कौशल से अनेक अद्भुत रचनाएं कीं। हमें भी बुद्धि, ज्ञान, परिश्रम और श्रेष्ठ कर्म करने की शक्ति प्रदान करें।
हमारे घर और कार्यस्थल में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखें। हमारे औजारों, मशीनों और कार्यों की रक्षा करें। हमें अपने कर्म के प्रति ईमानदार और समर्पित बनाएं।
9. विश्वकर्मा भगवान की आरती
अब दीपक जलाकर भगवान विश्वकर्मा की आरती करें।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के रचयिता, जय श्री विश्वकर्मा॥
शिल्प कला के स्वामी तुम, जग के पालनहारे।
औजारों में शक्ति भरो, काटो दुख हमारे॥
कारखाने और कार्यस्थल में, तेरा वास रहे।
मेहनत करने वाले जन का, सदा विकास रहे॥
ज्ञान बुद्धि और कौशल देना, कर्म में सिद्धि दिलाओ।
विश्वकर्मा भगवान हमारे, सदा कृपा बरसाओ॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के रचयिता, जय श्री विश्वकर्मा॥
10. पुष्पांजलि और प्रार्थना
दोनों हाथों में पुष्प और अक्षत लेकर प्रार्थना करें।
प्रार्थना
हे भगवान विश्वकर्मा, हमारी पूजा स्वीकार करें। हमारे घर, परिवार, व्यापार और कार्यस्थल पर अपनी कृपा बनाए रखें। हमें ज्ञान, कौशल, सफलता, सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करें।
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः॥
11. क्षमा प्रार्थना
पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगें।
मंत्र
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
हे प्रभु, मंत्र, विधि या भक्ति में मुझसे जो भी त्रुटि हुई हो, उसे क्षमा करके मेरी पूजा स्वीकार करें।
12. प्रसाद वितरण
अंत में भगवान को अर्पित नैवेद्य का प्रसाद सभी लोगों में वितरित करें और भगवान विश्वकर्मा से सुख, समृद्धि तथा कार्य में उन्नति की प्रार्थना करें।
जय श्री विश्वकर्मा भगवान की जय।
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः॥
धार्मिक महत्व
विश्वकर्मा पूजा हिंदू धर्म में शिल्प, निर्माण, वास्तुकला, औजार और कर्म के प्रति सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पी और दिव्य वास्तुकार माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उन्होंने देवताओं के लिए अनेक भव्य भवनों, नगरों और दिव्य अस्त्रों का निर्माण किया।
विश्वकर्मा पूजा के दिन औजारों, मशीनों और कार्यस्थल की पूजा करने की परंपरा है। इसका उद्देश्य केवल उपकरणों की पूजा करना नहीं, बल्कि अपने कर्म, कौशल और आजीविका के साधनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना भी है।
1. कर्म और श्रम का सम्मान
भगवान विश्वकर्मा की पूजा मेहनत, श्रम और हुनर को सम्मान देने का संदेश देती है। यह दिन याद दिलाता है कि किसी भी कार्य की सफलता में ज्ञान, कौशल और परिश्रम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
2. औजार और मशीनों की पूजा
कारीगर, इंजीनियर, शिल्पकार, तकनीशियन, मजदूर और उद्योगों से जुड़े लोग अपने औजारों और मशीनों की पूजा करते हैं। धार्मिक दृष्टि से इन्हें आजीविका प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।
3. कार्यस्थल की शुद्धि और मंगलकामना
पूजा से पहले कार्यस्थल की सफाई और सजावट की जाती है। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का पूजन करके कार्यस्थल पर सुख, शांति, सुरक्षा और सफलता की प्रार्थना की जाती है।
4. व्यापार और कार्य में उन्नति
मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यापार तथा व्यवसाय में उन्नति के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
5. ज्ञान और कौशल की प्राप्ति
भगवान विश्वकर्मा को शिल्प और तकनीकी ज्ञान का अधिष्ठाता माना जाता है। इसलिए उनकी पूजा करते समय व्यक्ति अपने कार्य में बुद्धि, रचनात्मकता, कौशल और सफलता की प्रार्थना करता है।
6. सुरक्षा और समृद्धि की प्रार्थना
कार्यस्थल पर मशीनों और औजारों का उपयोग करने वाले लोग भगवान विश्वकर्मा से दुर्घटनाओं से सुरक्षा और कार्य में सफलता की कामना करते हैं। पूजा के माध्यम से परिवार और व्यवसाय में सुख-समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना भी की जाती है।
इस प्रकार विश्वकर्मा पूजा का धार्मिक महत्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्म, कौशल, श्रम, सृजन और आजीविका के साधनों के प्रति सम्मान की भावना को भी दर्शाती है।

