गणेश स्थापना का मुहूर्त और कुछ विशेष जानकारी
इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, 2026 सुबह 07:06 बजे से शुरू होगी। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है, जिसका समापन अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के साथ होता है। गणेश चतुर्थी पर भक्त घर में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं.कोई डेढ़ दिन तो कोई 3, 5, 7 या पूरे 10 दिन तक गणेश जी को घर में रखता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, घर में भगवान गणेश की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है। गणपति को बुद्धि, सुख-समृद्धि और विघ्नों को दूर करने वाला देवता कहा जाता है।
घर के मंदिर के लिए बैठी हुई मुद्रा में गणेश जी की मूर्ति को अच्छा माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह सुख, शांति और स्थिरता का प्रतीक होती है। बैठी हुई प्रतिमा घर में लंबे समय तक पॉजिटिव एनर्जी और पारिवारिक सुख का संदेश देती है
गणेश जी की #सूंड बाईं ओर होने वाली मूर्ति को घर के लिए शुभ और पूजन में आसान माना जाता है। दाईं ओर सूंड वाले गणपति को भी विशेष माना जाता है, लेकिन उनकी पूजा के नियम थोड़े अलग होते हैं। इसलिए सामान्य घरेलू पूजा के लिए बाईं ओर सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति को प्राथमिकता दी जाती है।
मूर्ति में गणेश जी प्रसन्न मुद्रा में हों और उनका स्वरूप शांत दिखाई दे, इसे शुभ माना जाता है। मूर्ति बहुत बड़ी हो, ऐसा जरूर नहीं है। घर के मंदिर के अनुसार छोटी और साफ-सुथरी मूर्ति ले सकते हैं। गणेश जी के हाथ में मोदक, अंकुश और अन्य शुभ प्रतीकों वाली मूर्ति भी लोकप्रिय मानी जाती है।
मूर्ति टूटी हुई या खंडित नहीं होनी चाहिए। खरीदने से पहले मूर्ति को ध्यान से देखें। अगर, गणेश जी की मूर्ति पूजा के लिए खरीद रहे हैं, तो उसे घर लाकर साफ और पवित्र स्थान पर रखें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करें।
इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, 2026 सुबह 07:06 बजे से शुरू होगी। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है, जिसका समापन अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के साथ होता है।
गणेशचतुर्थी पर भक्त घर में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं। कोई डेढ़ दिन तो कोई 3, 5, 7 या पूरे 10 दिन तक गणेश जी को घर में रखता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, घर में भगवान गणेश की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है। गणपति को बुद्धि, सुख-समृद्धि और विघ्नों को दूर करने वाला देवता कहा जाता है।
भगवान गणेश सभी देवी-देवताओं में प्रथम पूजनीय हैं। विवाह की अग्नि प्रज्वलित होने से पहले, नई दुकान खुलने से पहले या बहीखाते पर पहला पन्ना लिखे जाने से पहले भगवान गणेश का नाम लिया जाता है। वे विघ्नहर्ता हैं, जो बाधाओं को दूर करने वाले है। भाद्रपद माह के दस दिनों तक वे सिर्फ हमारी प्रार्थनाएं ही पूरी नहीं करते बल्कि वे धरती पर निवास करते हैं।
इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार के दिन है। जो महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात समेत देशभर के अलग-अलग हिस्सों में लाखों परिवारों के लिए भक्ति करने का सुनहरा मौका होता है। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी 2026 से जुड़ी सटीक तिथि, मूर्ति स्थापना मुहूर्त, पूजा विधि चरण, सामग्री, विसर्जन कैलेंडर समेत संपूर्ण जानकारी।
हिंदू पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को ही गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। अधिकांश हिंदू व्रत सूर्योदय के समय ही किए जाते हैं लेकिन गणेश स्थापना दोपहर के समय की जाती है।
ऐसा इसलिए क्योंकि माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म दोपहर में ही हुआ था। दोपहर के समय मूर्ति स्थापित करना काफी शुभ माना जाता है।
-गणेश चतुर्थी- सोमवार, 14 सितंबर 2026
-चतुर्थी तिथि का प्रारंभ- सुबह 7 बजकर 6 मिनट
-चतुर्थी तिथि समाप्त- सुबह 7 बजकर 44 मिनट, 15 सितंबर 2026
-स्थापना मुहूर्त नई दिल्ली- सुबह 11 बजकर 2 मिनट से 1 बजकर 31 मिनट तक
-स्थापना मुहूर्त मुंबई- सुबह 11 बजकर 20 मिनट दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक
-स्थापना मुहूर्त पुणे- सुबह 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 1 बजकर 44 मिनट तक
-स्थापना मुहूर्त कोलकाता- सुबह 10 बजकर 18 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक
-मुख्य विसर्जन की तिथि- 25 सितंबर 2026, शुक्रवार
गणेश स्थापना और पूजा विधि
सुबह जल्दी स्नान करने के बाद नए कपड़े या साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करें और उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें। आसन पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। स्वास्तिक बनाएं और मूर्ति के केंद्र में अक्षत रखें।इसके बाद दाहिने हाथ में जल, अक्षत और एक फूल लें और अपने संकल्प बताएं। अंत में जल को विसर्जित कर दें।
दोपहर को शुभ मुहूर्त में मूर्ति को अक्षत पर स्थापित करें। उस पर गंगा जल छिड़क कर ऊं गम गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें। इसके बाद मूर्ति के बगल में पानी से भरा तांबे कलश, एक सिक्के, सुपारी और आम के पत्ते, नारियल रखें।
चंदन और रोली का तिलक लगाएं। अक्षत, मौली धागा, फूल, 21 पत्तियों वाली दूर्वा घास और यदि संभव हो तो लाल गुड़हल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाएं।
इसके बाद पंचमेवा, मिश्री और फल के साथ 21 मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश चतुर्थी कथा और स्यमंतक मणि की कथा पढ़ें। इसके बाद गणेश जी की आरती करें।
जितने दिन भगवान आपके घर में विराजमान रहें, उतने दिन दो बार सुबह और शाम आरती करें। वे अतिथि हैं और उनके साथ अतिथि जैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए।
गणेश चतुर्थी 2026 सामग्री
-गणेश मूर्ति
-गंगाजल
-तांबे का कलश
-रोली, कुमकुम और चंदन
-अक्षत
-मौली धागा
-देसी घी और भीमसेनी कपूर
-सुपारी और हल्दी की गांठ
-पंचमेवा और मिश्री
-आरती की थाली
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